lockdown & liqour: शराबियों पर बड़ी जिम्मेदारी-सोशल डिस्टेसिंग को मात देती शराब की लबीं लाइनें

lockdown & liqour: शराबियों पर बड़ी जिम्मेदारी-सोशल डिस्टेसिंग को मात देती शराब की लबीं लाइनें
lockdown & liqour: शराबियों पर बड़ी जिम्मेदारी

आप देख रहे हैं न्यूज विद आजाद खालिद और प्राइम टाइम न्यूज विद आजाद खालिद में स्वागत है। कोरोना वायरस को मात देने के लिए लॉकडॉउन है। कॉलेज बंद हैं, स्कूल बंद हैं, सभी व्यापारिक संस्थान बंद हैं। लेकिन शराब की दुकानें खुली हैं, गुटखा उपलब्ध है, पान मसाला खा सकते हैं। यानि थूक भी सकते हैं और बहक भी सकते हैं। इस बीच कांग्रेस ने मजदूरों की घर वापसी पर सरकार को घेरा है। और कहा है कि पीएम केयर्स फंड या किसी भी तरह के दान में जो पैसा आया है उस पर मजदूरों का पहला हक है। साथ ही सोनिया गांधी ने ऐलान किया है कि मजदूरों के घर जाने के लिए रेल का किराया कांग्रेस देगी। उधर सरकार का दावा है कि मजदूरों से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है। कुल मिलाकर इस मामले पर अब खुलेतौर पर सियासत होती दिख रही है। लेकिन लॉकडॉउन के दौरान न सिर्फ शराब की दुकानों पर सभी नियम टूटते दिखे बल्कि पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद तीन लोगों की मौत और नोएडा में एक युवक की हत्या ने सवाल उठा दिया है कि ये कैसा लॉकडॉउन है। देखिए प्राइम टाइम न्यूज विद आजाद खालिद।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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