in depth investigation of indian media: क्या मीडिया को कभी माफ कर पाओगे?

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क्या मीडिया को कभी माफ कर पाओगे?
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क्या मीडिया को कभी माफ कर पाओगे?
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क्या मीडिया को कभी माफ कर पाओगे?

तफ्तीश मे आपका स्वागत है। दुनियां का हाल सबके सामने है लेकिन भारत में बीमार और संक्रमित लोगों की तादाद सबके सामने है। घातक बीमारी से मरने वालों की संख्या के अलावा सड़क, रेल और ट्रैक पर हासदों में मरने वालों की संख्या भी काफी हो चुकी है। लेकिन हमारा मीडिया जिसकी ज़िम्मेदारी थी समाज को जागरुक करना और सच्चाई से अवगत कराना उसने सिर्फ तबलीग और समुदाय विशेष को टारगेट करने के अलावा कुछ नहीं किया। लॉकडॉउन जब लगा तब संक्रमित लोगों की संख्या क्या थी और जब हम पांचवे चरण पहुंचे तब दो लाख के करीब हो गई और मरने वालों की तादाद पांच हज़ार से अधिक हो गई। जबकि इसमें सड़क हादसों, रेलवे ट्रैक और ट्रेन के अंदर मरने वालों की तादाद नहीं जोड़ी गई है। तो क्या जो सवाल उठने तो वो मीडिया ने उठाए या फिर वही दिखाया जो उसके लिए फायदे का सौदा था। इसी सब पर बात करते हैं। आज के तफ्तीश में। #tafteeshofmedia #tafteesh_indianmedia #tafteesh_media #tafteesh #taftish #tafteesh_in_depth_investigation #tafteesh_investigation #taftish_azadkhalid #azad_khalid_tafteesh #azadkhalid

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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