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योगी जी आपके अफसरों को न जनता की फरियाद सुनने का समय न फोन उठाने का!

ग़ाज़ियाबाद (16 मार्च 2018)- उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के नतीजे कोई एक दिन का परिणाम हैं या ये योगी सरकार की नाकामी है, या फिर कुछ अफसरों की मनमानी का नतीजा। देश के सबसे बड़े प्रदेश के मुखिया होने के नाते योगी आदित्नाथ की ज़िम्मेदारियां यक़ीनन बहुत हैं। ये सच्चाई है कि योगी आदित्यनाथ ने सड़क से लेकर बड़ी राजनीति के अलावा कई बार सांसद रहते हुए साबित किया है कि उनको अपना काम पसंद है और वो जनता की सेवा को सर्वोपरि मानते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या योगी के अफसरों को भी अपनी ज़िम्मेदारी का इतना ही एहसास है।
चलिए आज आपको इस सवाल का बेहद सच्चा और सटीक जवाब सुनाते ही नहीं… दिखाते भी हैं। गाज़ियाबाद ज़िला मुख्यालय, जिलाधिकारी के आवास और कार्यालय, एसएसपी के घर और कार्यालय से से महज़ 5-6 किलोमीटर दूर ग्राम मिसलगढ़ी के पुराने रास्ते और पानी की निकासी को कुछ दंबगों ने पुलिस और प्रशासन के ही कुछ अफसरों की सांठ-गांठ के बाद कई माह पहले बंद कर दिया था। इस बारे में तहसील दिवस, जिलाधिकारी गाजियाबाद, सीएम उत्तर प्रदेश यहां तक की पीएमओ तक को शिकायत भेजी गई थी।
लेकिन गाजियाबाद प्रशासन ने न सिर्फ भूमाफिया को सपोर्ट किया बल्कि पीएमओ और सीएम योगी आदित्यनाथ तक को गलत रिपोर्ट भेज कर गुमराह किया। हालात ये है कि दिल्ली से सटे गाजियाबाद का एक गांव मिसलगढ़ी और इंद्रगढ़ी जहां की ज़मीन का अधिग्रहण करके गोविंदपुरम जैसी पॉश कॉलोनी बसाई गई है। उसी गोविंदपुरम के सी-ब्लाक से सटे गांव के लोग न सिर्फ मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं बल्कि गांव का पंरपरागत गंदे नाले का पानी जो कि भू माफिया ने रोक दिया था,

COMPLAINT TO PMO
COMPLAINT TO PMO

वो उनके ही घरों में वापस जा रहा है। और कई माह से गांव के लोग रास्ते तक को तरस रहे हैं। ये हाल बीजेपी की उस सरकार का है जो केंद्र से लेकर राज्य तक में सत्ता में है और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का दावा करती है।
इतना ही नहीं इस मामले पर गाजियाबाद की जिलाधिकारी को कई बार फोन किया गया, उनके व्हाट्सएप नंबर पर डिटेल भेजी गई। लेकिन शायद वो बहुत व्यस्त रहती हैं और उनको शायद न फोन उठाने की आदत है न ही जनता के फोन का जवाब देने की।
ये हाल है दिल्ली से सटे गाजियाबाद का तो उत्तर प्रदेश के दूर दराज़ के गावों का हाल और भी बदतर हो सकता है। लेकिन क्या इसके लिए योगी जी कुछ अफसरों की ज़िम्मेदारी तय करेंगे। अगर नहीं तो… जनता फिलहाल तो बर्दाश्त कर लेगी, लेकिन जब भी समय मिलेगा जवाब ज़रूर देगी।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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