भारत में कोरोना से कुल मौत की 23% मुंबई में, डेथ रेट 3.68%; अमेरिका की 22% मौतें न्यूयॉर्क में, डेथ रेट 6.41%



देश की आर्थिक राजधानी मुंबई कोरोना की सबसे बुरी मार झेल रही है। अकेले मुंबई में 13 जून तक कोरोना के 55 हजार 451 मामले आ चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंच गया है। महाराष्ट्र में 3 हजार 717 मौतें हो चुकी हैं, जिसमें से 55% यानी 2 हजार 44 मौतें सिर्फ मुंबई में ही हुईं।

देश में कुल संक्रमितों की संख्या 3 लाख 8 हजार 993 हो गई है। इसमें से 17% मामले तो अकेले मुंबई में ही हैं। इतना ही नहीं, जितने मामले और मौतें मुंबई में हुई हैं, उतने मामले और मौतें तो देश के 30 राज्यों में भी नहीं हुई। देश में 13 जून तक 8 हजार 884 मौतें हुई हैं, जिनमें से 23% मौतें अकेले मुंबई में हुई हैं।

इन्हीं सब कारणों से एक सवाल बार-बार सामने आ रहा है कि क्या कोरोना के मामले में मुंबई, अमेरिका के न्यूयॉर्क की राह पर है। न्यूयॉर्क में 3 लाख 81 हजार 714 मामले आ चुके हैं और 24 हजार 495 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से जितने लोगों की मौत हुई है, उनमें से 22% मौतें न्यूयॉर्क में हुई है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 1 लाख 13 हजार 914 है।

1) पॉपुलेशन डेंसिटी : न्यूयॉर्क से ज्यादा घना है मुंबई
मुंबई देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे घनी आबादी वाला शहर है। यहां करीब 2 करोड़ की आबादी 600 स्क्वायर किमी में रहती है। यहां हर एक किमी के दायरे में 33 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। जबकि, न्यूयॉर्क की आबादी 85 लाख के आसपास ही है और यहां हर किमी के दायरे में 10 हजार से ज्यादा लोग ही रहते हैं।

2) केस की रफ्तार : न्यूयॉर्क में रफ्तार घटी, मुंबई में बढ़ी
कोरोनावायरस के नए मामलों की रफ्तार न्यूयॉर्क में तो घटनी शुरू हो गई है, लेकिन मुंबई में लगातार बढ़ती जा रही है। एक समय था जब न्यूयॉर्क में रोजाना 8 हजार से 11 हजार के बीच नए मामले आ रहे थे।

न्यूयॉर्क के हेल्थ डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर 11 जून तक के आंकड़े मौजूद हैं। इसके मुताबिक, पिछले 14 दिन से यहां रोजाना 1500 से कम नए मामले सामने आ रहे हैं।

जबकि, मुंबई में 17 मई से रोजाना हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। 17 मई के बाद से 11 जून के बीच मुंबई में 35 हजार 263 मामले आए हैं। यानी, मुंबई में अब तक जितने संक्रमित मिले हैं, उनमें से 65% से ज्यादा मरीज 17 मई के बाद आए हैं।

3) टेस्टिंग : जितने टेस्ट न्यूयॉर्क में हुए, उसका 10% भी मुंबई में नहीं हुए
न्यूयॉर्क में 11 जून तक 28 लाख 1 हजार 400 लोगों के टेस्ट हो चुके हैं। जबकि, 12 जून तक मुंबई में 2 लाख 47 हजार 696 लोगों की कोरोना जांच हुई है। यानी, जितनी जांच न्यूयॉर्क में हुई है, उसकी तुलना में मुंबई में सिर्फ 8.84% ही टेस्ट हुए हैं।

इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क की तुलना में मुंबई का पॉजिटिविटी रेट भी ज्यादा है। न्यूयॉर्क का पॉजिटिविटी रेट 13.6% और मुंबई का 21.79% है।

इसके अलावा, 12 जून तक मुंबई में हर 10 लाख आबादी पर 19 हजार 42 लोगों की कोरोना जांच हुई है। जबकि, न्यूयॉर्क में यही आंकड़ा 1 लाख 44 हजार 14 का है।

4) मौतें : मुंबई में 77% और न्यूयॉर्क में 95% मौतें 50 साल से ऊपर मरीजों की
कई स्टडी में ये सामने आया है कि कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा खतरा 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को है। आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं।

मुंबई में 12 जून तक 2 हजार 42 लोगों की मौत हुई। इनमें से 77% यानी 1 हजार 588 लोगों की उम्र 50 साल या उससे ऊपर थी। इसी तरह न्यूयॉर्क में 24 हजार 495 मौतों में से 23 हजार 216 मौतें 50 साल से ऊपर मरीजों की हुई है। ये कुल मौतों का 95% है।

5) अस्पताल : मुंबई में 17,847 बेड, इनमें से अब 26% ही खाली
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए हेल्थ फैसिलिटी को तीन कैटिगरी में बांटा है। पहली कैटेगरी में डेडिकेटेड कोविड अस्पताल हैं, जहां गंभीर मरीजों का इलाज होगा। दूसरी कैटेगरी कोविड हेल्थ सेंटर की है, जहां कम गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाएगा। तीसरी कैटेगरी में कोविड केयर सेंटर है, जहां बिना लक्षण वाले या कम लक्षण वाले मरीजों को रखा जाएगा।

बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, 12 जून तक इन तीनों कैटेगरी में 17 हजार 848 बेड हैं, जिनमें से 13 हजार 256 यानी 76% बेड पर मरीज हैं। इनमें से 1 हजार 197 आईसीयू बेड भी हैं, जिनमें अब सिर्फ 20 बेड ही खाली हैं।

जबकि, 5 हजार 325 ऑक्सीजन बेड में से 4 हजार 80 और 538 वेंटिलेटर में से 515 बेड भरे हुए हैं।

दोनों जगह संक्रमण क्यों फैला, इसके 3 कारण

  • पहला कारण : मुंबई और न्यूयॉर्क दोनों ही घनी आबादी वाले हैं। मुंबई में हर एक किमी के दायरे में 33 हजार और न्यूयॉर्क में 10 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।
  • दूसरा कारण : मुंबई में लोकल ट्रेन और न्यूयॉर्क में मेट्रो ट्रेन ही यहां के लोगों की पहली पसंद है। न्यूयॉर्क और मुंबई में हर दिन लाखों लोग इनसे यात्रा करते हैं। दोनों जगह मामले बढ़ने के बाद भी लोग इनसे सफर करते रहे।
  • तीसरा कारण : मुंबई और न्यूयॉर्क, दोनों ही अपने-अपने देश की आर्थिक राजधानी हैं। लिहाजा, यहां विदेशियों का आना और यहां के लोगों का विदेश जाना लगा रहता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, मार्च-अप्रैल में मुंबई एयरपोर्ट पर 4.79 लाख अंतर्राष्ट्रीय और 16.71 लाख घरेलू यात्रियों का मूवमेंट रहा था। वहीं, न्यूयॉर्क में हर साल 6 करोड़ से ज्यादा पर्यटक भी आते हैं। इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क में सबसे ज्यादा चीनी नागरिक रहते हैं।

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Originally published on www.bhaskar.com

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