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पत्रकारों की सुरक्षा पर अलग से कोई प्रस्ताव नहीं-हर व्यक्ति की सुरक्षा राज्य की ज़िम्मेदारी

security for journalist
नई दिल्ली(5अगस्त2015)- पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सरकार के पास अलग से कोई योजना नहीं है। मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्यस मंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी ने एक प्रश्नग के लिखित उत्तमर में बताया कि राष्ट्री य अपराध रिकार्ड ब्यूईरो यानि एनसीआरबी ने साल 2014 से गंभीर चोट के अंतर्गत मीडियाकर्मियों पर हमले के आंकड़े इकट्ठे करना शुरू किए हैं। पत्रकारों की हत्या के आंकड़े अलग से नहीं रखे जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 के दौरान मीडियाकर्मियों पर हमले (गंभीर चोट) के अंतर्गत कुल 113 मामले दर्ज किए गए थे और 30 व्यकक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।
हरिभाई चौधरी ने बताया कि गृह मंत्रालय को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से भी पत्रकारों की सुरक्षा पर कोई रिपोर्ट प्राप्तउ नहीं हुई है, और पत्रकारों पर हमले की जांच के लिए विशेष कार्य बल के गठन का कोई प्रस्ता्व नहीं है। उन्होने बताया कि किसी व्यलक्ति को सुरक्षा देने का प्रावधान उस राज्यह सरकार की मुख्या जिम्मेकदारी है, जिसके क्षेत्राधिकार में आम तौर पर वह व्यदक्ति निवास करता है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा खतरे के मूल्यांिकन के आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाती है। पत्रकारों/मीडियाकर्मियों के लिए सुरक्षा प्राप्तं करने वालों का अलग से कोई वर्गीकरण नहीं है, हालांकि सुरक्षा कवर के लिए आवेदन देने वालों में पत्रकार/मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। पत्रकारों/ मीडियाकर्मियों सहित सभी व्य क्तियों से प्राप्तर अभ्यांवेदनों को उनके ऊपर खतरे का मूल्यांरकन करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को भेज दिया जाता है। उनके ऊपर खतरे के मूल्यांरकन के अनुसार सुरक्षा प्रदान करने के लिए संबंधित राज्य सरकरों/पुलिस को उपयुक्तर परामर्शी पत्र जारी किए जाते हैं।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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