कश्मीरी पंडितों और घाटी की आग के साथ नक्सल समस्या पर भी करना होगा ग़ौर?

sukmaनई दिल्ली(24 अप्रैल 2017)- जन्नत में आग, घाटी में आतंक और पत्थरबाज़ो का क़हर जैसे मुद्दों से देश के मीडिया हाउसों की स्क्रीन अटी पड़ीं है। लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जो तरसते रहते हैं कि उन पर भी बहस हो सके। कई समस्याएं ऐसी हैं जिससे देश के लाखों नागरिक त्रस्त हैं। लेकिन सवाल ये है कि आख़िर उनका हल कब निकलेगा। सवाल ये भी है कि नक्सलियों के हाथों मारे जाने वाले लोग और शहीद होने वाले जवान किसी के बेटे, किसी के पिता या किसी के सुहाग नहीं होते। झीरम घाटी हो या फिर सुकमा या फिर जगदलपुर, दंतेवाडा़ जैसे कई नाम हैं जहां नक्सलियों के हमले भी हुए और कई बडे़ अफसरों तक को या तो अपहरण कर लिया गया या फिर मार डाला गया।
अगर तुलनात्मक बात की जाए तो कश्मीर की समस्या देश की बड़ी समस्या भले ही हो लेकिन नक्लियों के हाथों मारे जाने वालों की भी तादाद कम नहीं रही है। कुछ ऐसा ही हुआ 24 अप्रैल 2017 को भी, जब सुकमा में सीआरपीएफ जैसी मज़बूत सुरक्षा ऐजेंसी के 24 जवानों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया।
आज हम बात करतें हैं कुछ ऐसे वाक़यात की जब नक्सली समस्या किसी भी अंदाज़ से कश्मीरी समस्या से कमतर नहीं दिखती। ये अलग बात है कि इस मुद्दे पर हम शतुरमुर्ग की तरह मुंह छिपाकर अपनी ज़िम्मेदारी से बचते रहे हैं।
सबसे पहले एक बार फिर बात करते हैं आज की घटना की जहां नक्सलियों ने एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों पर घाट लगाकर जोरदार हमला किया। जानकारी के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए इस हमले में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हो गए। यह सभी जवान सीआरपीएफ 74 बटालियन के थे। हमले के बाद नक्सली, जवानों का हथियार भी लूटकर ले गए।
लेकिन अगर ज़मीनी सच्चाई पर नज़र डालें तो देशभर में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडीशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र सहित दर्जभर राज्य नक्सली हिंसा की आज भी गिरफ्त में हैं। आंकड़ों की अगर बात करें तो साल 2002 से 2006 के दौरान नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ों में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इतना ही नहीं साल 2009 तक नक्सली मुठभेड़ों के चलते करीब साढ़े तीन लाख जनजातीय क्षेत्रों के रहने वालों को अपने पुरखों के स्थल को छोड़ना पड़ा था।
इसके अलावा हाल के समय में देश में हुए बड़े नक्सली हमले की बात करें तो फहरिस्त लंबी है।
2014 में सुकमा में हमला
1 दिसंबर 2014 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीआरपीएफ के 14 जवानों की जान चली गई थी। 12 लोग घायल भी हुए थे।
सुकमा में हुआ था 2013 में हमला
साल 2013 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की झीरम घाटी में नक्सलियों ने बड़ा हमला किया था। 25 मई 2013 को हुए उस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री वीसी शुक्ल, महेंद्र कार्मा और नंद कुमार पटेल भी थे।
झारखंड में भी हुआ 2012 में हमला
इसके अलावा झारखंड के गढ़वा जिले में बरिगांवा के जंगलों में नक्सलियों ने लैंडमाइन ब्लास्ट किया था। पुलिस दल को निशाना बना कर किये गये इस हमलें में एक अधिकारी समेत 13 जवान शहीद हो गए थे।
दांतेवाड़ा में 2010 हुआ था हमला
नक्सलियों के इस हमले को अगर अब तक का सबसे बड़ा हमला कहा जाए तो गलत न होगा। 6 अप्रैल 2010 को सीआरपीएफ जवानों पर बड़े नक्सली हमलें में 2 पुलिसकर्मियों सहित 76 जवानों की जान गई थी।
2010 में जनेस्वरी एक्सप्रेस रेल हमला
28 मई 2010 को पश्चिम बंगाल के वेस्ट मिदनापुर ज़िले में नक्सलियों ने जोरदार हमला बोल दिया था। जिसमें जनेस्वरी एक्सप्रेस पटरी से उतर गई, जिसमें करीब 150 लोगों की मौत हो गई थी।
2010 में सिल्डा कैंप पर हमला
15 फरवरी 2010 को पश्चिम बंगाल में सिल्डा कैंप पर हुए नक्सली हमले में अर्द्धसैनिक बल के 24 जवानों शहीद हुए थे।
2007 में पुलिस आउटपोस्ट पर हमला
छत्तीसगढ़ के ही रानी बोडी गांव में एक पुलिस आउटपोस्ट पर 500 से ज्यादा नक्सलियों ने साल 2007 में हमला बोल दिया था। इस हमले में 55 पुलिसकर्मी मारे गए थे। इनमें से 24 राज्य पुलिस के जवान थे, जबकि 31 अन्य स्पेशल पुलिस ऑफिसर थे।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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