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गुजरात का क़िला-बीजेपी की साख का सवाल ! कौन हैं करोड़ों बांटने वाले कालेधन के सौदागर ?

gujrat election & black money
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अहमदाबाद (23 अक्तूबर 2017)- ठीक एक साल पहले केंद्र की बीजेपी सरकार ने नोटबंदी जैसे सख़्त क़दम की वकालत करते हुए कहा था कि कालाधन क़ाबू किया जा रहा है। वैसे भी भारतीय जनता पार्टी की कमान वाली मोदी सरकार कालेधन के विरुद्ध सख़्त बनती दिख रही थी। लेकिन अपने सबसे मज़बूत क़िले गुजरात को बचाने के लिए उस पर जो आरोप लग रहे हैं न सिर्फ बेहद गंभीर हैं बल्कि पार्टी लाइन को शक के दायरे में खड़ा करने के लिए काफी हैं!
दरअसल गुजरात में पिछले कई टर्म से सत्ता पर क़ाबिज़ बीजेपी और सत्ता को तरस रही कांग्रेस के बीच सियासी घमासान इस वक़्त चरम पर है। जहां कांग्रेस पटेल समाज और कई दूसरे समाजों को जोड़ने की जुगत में है वहीं भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि उसने चुनावों में समर्थन देने के लिए पटेल समाज के एक नेता को एक करोड़ रुपए देने की पेशकश करते हुए 10 लाख रुपये बतौर एडवांस दिये हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी चुनाव के दौरान कथिततौर पर जो करोड़ों रुपए बांट रही है उसका स्रोत क्या है? साथ ही क्या कालेधन को क़ाबू करने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी ख़ुद कालेधन का इस्तेमाल कर रही है?
आपको याद दिला दें कि गुजरात में बीजेपी को पटेल नेताओं ने जोर का झटका दिये जाने की ख़बर है। रविवार को जहां पाटीदार आंदोलन के अगुआ रहे हार्दिक पटेल के एक सहयोगी नरेंद्र पटेल ने बीजेपी पर समर्थन देने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया वहीं कुछ दिन पहले भाजपा में शामिल हुए निखिल सवानी ने भी सोमवार बीजेपी का साथ छोड़ दिया है। नरेंद्र ने दावा किया था कि बीजेपी ने उन्हें बीजेपी में शामिल करने के लिए एक करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया था और बतौर एडवांस 10 लाख रुपए दिये थे। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नरेंद्र ने मीडिया को 10 लाख रुपये कैश भी दिखाए जो कथित तौर पर वरुण पटेल ने उन्हें दिए थे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र के आरोपों को खारिज कर रही है।
उधर सवानी ने नरेंद्र पटेल के दावों को भी सही ठहराया है। सवानी ने बीजेपी पर पाटीदार बिरादरी के साथ छल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मैं जिस उम्मीद के साथ बीजेपी में शामिल हुआ था वह पूरा नहीं हुआ। बीजेपी पैसे के दम पर पाटीदारों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। बीजेपी को केवल चुनाव के समय ही पाटीदारों की याद आती है। मुझसे किया गया वादा बीजेपी ने पूरा नहीं किया। सवानी ने बीजेपी पर वोटबैंक की राजनीति का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का वक्त मांगेंगे।
जबकि नरेंद्र पटेल ने कहा था कि वरुण पेटल मुझे गांधीनगर ले गये थे। इसके बाद हमलोग बीजेपी दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होने मुझे गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतूभाई वघानी और अन्य मंत्रियों से मिलवाया था। वहीं एक कमरे में ले जाकर बतौर टोकन 10 लाख रुपये दिए गये थे। साथ ही वरुण ने मुझसे वादा किया कि वह अगले दिन बीजेपी के एक कार्यक्रम में 90 लाख रुपये भी दे दिये जाएंगे। हालांकि वरुण पटेल ने नरेंद्र पटेल के इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर कालेधन को क़ाबू करने वाली सरकार गुजरात में होने वाले करोड़ों के काले लेन-देन को कैसे क़ाबू करेगी? साथ ही क्या अपने क़िले को बचाने के लिए पार्टी विद ए डिफ्रेंस वाली पार्टी भी जनता से किये वादों को भुला देगी?

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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